।। नमोऽस्तु रामाय ।।
उत्तराधिकारी पूज्य स्वामी राघव दास जी महाराज
जगद्गुरु रामानन्दाचार्य पदप्रतिष्ठित परमपूज्य स्वामी श्री रामनरेशाचार्य जी महाराज द्वारा नामित उत्तराधिकारी विरक्त शिष्य पूज्य स्वामी राघव दास जी महाराज, अपने गुरु के अनन्य सेवक, मेधावी शिष्य एवं विलक्षण विद्वान युवा संत के रूप में सम्प्रदाय में विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुके हैं। अध्यात्म, शास्त्रज्ञान, गुरुसेवा एवं विनम्र साधुता का अद्भुत समन्वय उनके व्यक्तित्व में सहज रूप से दृष्टिगोचर होता है।
बिहार प्रान्त के आरा जनपद स्थित परसिया ग्राम में श्री गणेश मिश्र जी के पावन कुल में जन्मे स्वामी राघव दास जी, संन्यास पूर्व “चन्द्रशेखर मिश्र” नाम से परिचित थे। बाल्यावस्था से ही उनमें आध्यात्मिक संस्कार एवं वैदिक अध्ययन के प्रति विशेष अनुराग था। मात्र नौ वर्ष की आयु में वर्ष 2008 में काशी आगमन कर उन्होंने जगद्गुरु स्वामी श्री रामनरेशाचार्य जी महाराज के श्रीचरणों में शिष्यत्व ग्रहण किया तथा निरंतर गुरुसेवा एवं विद्याध्ययन में संलग्न रहे।
24 सितम्बर 1998 को जन्मे स्वामी जी ने श्रीमठ में रहकर शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा का गंभीर अध्ययन किया। साथ ही 2011 से 2015 तक प्रथमा, पूर्व मध्यमा एवं उत्तर मध्यमा की परीक्षाएँ उच्चतम अंकों सहित उत्तीर्ण कर अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय दिया। तत्पश्चात् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से वर्ष 2018 में शास्त्री उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याकरण विषय से आचार्य पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया एवं वर्ष 2020 में आचार्य उपाधि अर्जित की।
विद्यानुराग की निरंतरता में उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से वर्ष 2022 में वेद विषय में स्नातकोत्तर की द्वितीय उपाधि सर्वाधिक अंकों सहित प्राप्त की। वर्तमान में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में विद्यावारिधि (पी-एच.डी.) के शोधार्थी के रूप में शोधरत हैं। न्याय, सांख्य एवं वेदान्त जैसे गूढ़ शास्त्रों का अध्ययन भी वे अपने गुरु महाराज के सान्निध्य में सतत करते रहे हैं।
पूज्य स्वामी राघव दास जी महाराज का व्यक्तित्व अत्यन्त शालीन, मृदुभाषी, धर्मनिष्ठ एवं विद्यानुरागी साधक के रूप में प्रतिष्ठित है। उनकी गुरु भक्ति, सरलता, विनम्रता एवं आध्यात्मिक निष्ठा ने श्रीमठ से सम्बद्ध संत-मण्डली, शिष्यवृन्द एवं भक्तों के मध्य उन्हें विशेष प्रिय एवं श्रद्धेय बनाया है।
सम्प्रदाय एवं श्रीमठ परिवार को यह दृढ़ विश्वास है कि पूज्य स्वामी राघव दास जी महाराज अपनी प्रतिभा, शास्त्रविद्या, संगठन क्षमता एवं आध्यात्मिक दृष्टि से श्रीमठ एवं रामानन्दीय सम्प्रदाय की गौरवशाली परम्परा को नवीन ऊँचाइयों तक पहुँचाने में पूर्ण समर्थ सिद्ध होंगे। उनके उत्तराधिकारी नामित होने से सम्पूर्ण श्रीमठ एवं सम्प्रदाय में हर्ष, उत्साह एवं नव आशा का वातावरण व्याप्त है।